अध्यक्ष का सन्देश

आज के आधुनिक युग की शिक्षा, विशेष रूप से उच्च शिक्षा, न केवल जीवन की वास्तविकताओं का सामना करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह बौद्धिक संतुष्टि प्राप्त करने और हमारे समाज और राष्ट्र की वृद्धि और समृद्धि में योगदान करने का एक तरीका है।... आगे पढ़ें

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उद्देश्य


विनियामक आयोग का यह सामान्य कर्तव्य होगा कि यह -

  •  निजी विश्वविद्यालयों में अध्यापन, परीक्षा और गवेषणा का मानक बनाए रखने के लिये समस्त ऐसे कदम उठाये जिन्हें वह आवश्यक समझें।
  •  यह सुनिश्चित करे कि निजी विश्वविद्यालय केवल उतनी फीस और अन्य प्रभार संग्रहीत करे जो उनके द्वारा दी जाने शिक्षा की लागत को पूरा कर सके और युक्तियुक्त अधिशेष राशि भी प्रदान करे जिसका उपयोग वे आस्तियों के संधारण और विस्तार करने में कर सकें।
  •  यह सुनिश्चित करे कि निजी विश्वविद्यालय के अध्यापकों के पास विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अन्य किसी विनियामक निकायों द्वारा विहित न्यूनतम अर्हताएं हो।
  •  यह सुनिश्चित करे कि निजी विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की नियुक्ति, परिनियमों, अध्यादेशों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा अन्य संबंधित कानूनी निकायों द्वारा विहित मानदण्डों तथा मार्गदर्शन के अनुरूप की गई है।
  •  यह सुनिश्चित करे कि निजी विश्वविद्यालय में नामांकित छात्रों का शोषण न हो और उनसे असम्यक् या अत्यधिक फीस संग्रहीत करने के लिये अनैतिक तरीके न अपनाए जाऐं।
  •  निजी विश्वविद्यालय के समापन से संबंधित तथा उनके अनुसरण में कार्यवाही जिसमें पाठयक्रम पूरा करने की व्यवस्था, परीक्षाओं का संचालन, उपाधि आदि देना सम्मिलित है, किसी अन्य राज्य विश्वविद्यालय को इस रीति में कार्य सौंपने की कार्यवाही करें जिससे छात्र प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हों और निजी विश्वविद्यालय के समापन की प्रक्रिया के साथ छात्रों के लिए इन व्यवस्थाओं पर होने वाले व्यय को विन्यास निधि और या सामान्य निधि से पूरा किया जाएगा।