अध्यक्ष का सन्देश

विश्वविद्यालय केवल अभियंता, चिकित्सक, विधिवेत्ता, वैज्ञानिक और कुशल व्यापारी तथा शास्त्रज्ञ विद्वान ही तैयार न करें बल्कि ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करें, जिनका चरित्र उज्ज्वल हो, जो कर्तव्यपरायण और मूल्य निष्ठा से ओत प्रोत हों... आगे पढ़ें

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अवलोकन


मध्यप्रदेश राज्य भारतवर्ष का हृदय स्थली कहा जाता है जो कि संसाधनों से परिपूर्ण होने के साथ-साथ देश के अन्य भागों से सीधे सड़क, रेल एवं वायु मार्ग से जुड़ा है। वढ़ती युवाओं की संख्या के अनुपात में उच्च षिक्षा के गुणवत्ता पूर्ण षैक्षणिक संस्थान उपलब्ध न होने के कारण प्रदेष के तथा आस-पास के प्रदेषों के युवा उच्च षिक्षा प्राप्त करने हेतु अन्य राज्यों में विस्थापित हो रहे है जहॉ उन्हे आर्थिक समस्याओं के साथ-साथ अन्य प्रकार की कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अत: मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों की आवश्यकताओं की पूर्ति एवं उनकी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने की दृष्टि से तथा प्रदेश के युवाओं को प्रदेश में ही उच्च शिक्षा के उच्च स्तरीय अवसर प्रदान किये जाने के उद्देश्य से, देश में गुणवत्ता से युक्त उच्च शिक्षा प्रदान करने वाली अशासकीय प्रयोजी संस्थाओं (ट्रस्ट, कम्पनी, समिति) की सराहनीय भूमिका को स्वीकार करते हुए मध्यप्रदेष सरकार द्वारा राज्य में तकनीकी एवं चिकित्सा षिक्षा सहित उच्च शिक्षा प्रदान करने हेतु स्ववित्तपोषित निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और निगमन के लिये तथा उनके कृत्यों के विनियमन तथा उससे संसक्त या आनुषंगिक मामलों के लिये उपबंध करने हेतु एक अधिनियम 'म.प्र. निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2007' स्थापित किया गया।

इस अधिनियम की धारा 36 (अध्याय-4) में उल्लेखित प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार द्वारा, राज्य स्तर पर विनियामक विरचना प्रदान करने के प्रयोजन से तथा अध्यापन, परीक्षा, गवेषण, विस्तार कार्यक्रम, छात्रों के हितों का संरक्षण तथा कर्मचारियों की युक्तियुक्त सेवा शर्तो को सुनिश्चित करने के प्रयोजन हेतु और राज्य सरकार तथा केन्द्रीय विनियामक निकायों के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करने के लिए एक विनियामक आयोग की स्थापना की गई।